काश अग़र ऐसा होता ,
काश अग़र वैसा होता ,
काश कोई बंदिश ना होती ,
पूरी हर ख़्वाहिश होती .......
काश कोई दर्पण ऐसा होता
जिसमें दिल का रूप हो दिखता ,
हम-तुम होते खड़े सामने,
कुछ भी ना कहना पड़ता। …
काश कभी ग़र ऐसा होता ,
शब्दकोष में अपशब्द ना होते ,
ना ही कोई प्रयोग में लाता,
न कभी किसी का दिल दुखता।
काश कोई शक्ति ऐसी होती,
हवा प्रेम की ही बस बहती,
ईर्ष्या -द्वेष की जग़ह ना होती,
बस खुशियाँ ही खुशियाँ होती।
काश जहाँ कुछ ऐसा होता,
सब कुछ सुगम- सुन्दर होता,
हम -तुम सब साथ में होते,
ना कोई पीड़ा ना ग़म होता।
काश यहाँ उजले कपड़ों में,
दिल मैले से ना होते,
सोच तेरी दूषित ना होती,
ना ही मेरा दम घुटता।
काश जहाँ में लोगों के,
चेहरों पर चेहरे ना होते,
सुन्दर निश्छल मन होता,
हम-तुम सब कितने खुश होते।
काश प्रतिस्पर्धा की सीढ़ी का
आधार योग्यता ही होती
हर कोई यहाँ सफल होता,
अरमान नहीं रौंदे जाते।
काश मेरा सपना सच होता,
काश ये ख्वाहिश पूरी होती,
काश मैं जादूगर होती ,
तो दुनिया सचमुच ऐसी होती। ……
(अर्चना शुक्ला)
काश अग़र वैसा होता ,
काश कोई बंदिश ना होती ,
पूरी हर ख़्वाहिश होती .......
काश कोई दर्पण ऐसा होता
जिसमें दिल का रूप हो दिखता ,
हम-तुम होते खड़े सामने,
कुछ भी ना कहना पड़ता। …
काश कभी ग़र ऐसा होता ,
शब्दकोष में अपशब्द ना होते ,
ना ही कोई प्रयोग में लाता,
न कभी किसी का दिल दुखता।
काश कोई शक्ति ऐसी होती,
हवा प्रेम की ही बस बहती,
ईर्ष्या -द्वेष की जग़ह ना होती,
बस खुशियाँ ही खुशियाँ होती।
काश जहाँ कुछ ऐसा होता,
सब कुछ सुगम- सुन्दर होता,
हम -तुम सब साथ में होते,
ना कोई पीड़ा ना ग़म होता।
काश यहाँ उजले कपड़ों में,
दिल मैले से ना होते,
सोच तेरी दूषित ना होती,
ना ही मेरा दम घुटता।
काश जहाँ में लोगों के,
चेहरों पर चेहरे ना होते,
सुन्दर निश्छल मन होता,
हम-तुम सब कितने खुश होते।
काश प्रतिस्पर्धा की सीढ़ी का
आधार योग्यता ही होती
हर कोई यहाँ सफल होता,
अरमान नहीं रौंदे जाते।
काश मेरा सपना सच होता,
काश ये ख्वाहिश पूरी होती,
काश मैं जादूगर होती ,
तो दुनिया सचमुच ऐसी होती। ……
(अर्चना शुक्ला)